Monthly Archives: March 2017

नोटबंदी : अनाथ बच्चों की पीएम नरेंद्र मोदी से भावुक अपील, पुराने नोटों की एफडी करवा दें

 नोटबंदी के चलते राजस्थान के कोटा में रहने वाले दो अनाथ बच्चों के 96 हजार रुपए बेकार हो गए हैं. दोनों बच्चों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर इन पैसों की एफडी कराने की मांग की है. चिट्ठी में बच्चों ने लिखा है कि उसकी मां ने जीवन भर मजदूरी करके 96,500 हजार जमा किए थे. सारी रकम पुराने 1000 और 500 रुपए के नोटों में हैं. मां की मौत के बाद बच्चे अनाथ हो गए हैं. नोटबंदी के चलते बेकार हो गईं ये रकम को बच्चे चाह कर भी उपयोग नहीं कर पा रहे हैं. बच्चे ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर इन्हें नए नोटों में बदलवाने या बहन के नाम इसकी एफडी करवाने की मांग की है!!

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोटा में पूजा बंजारा दिहाड़ी मजदूर थी. साल 2013 में कथित रूप से उसकी हत्या कर दी गई थी. उसकी मौत के बाद सूरज और सलोनी बच्चे अनाथ हो गए हैं. फिलहाल दोनों कोटा की एक संस्था में रह रहे हैं. बाल कल्याण समिति, कोटा के चेयरमैन हरीश गुरबक्शानी ने बताया कि काउंसलिंग के दौरान दोनों ने बताया था कि आरके पुरम और सरवाडा गांव में उनके घर हैं. बाल कल्याण समिति के आग्रह पर पुलिस ने इस माह की शुरुआत में सरवाडा में उनके पुश्तैनी मकान की तलाशी कराई तो सोने-चांदी के जेवरात और एक बॉक्स में एक हजार के 22 व 500 के 149 पुराने नोट मिले.

इसके बाद समिति ने नोटों को बदलने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को 17 मार्च को पत्र लिखा, लेकिन 22 मार्च को ई-मेल के जरिए सूचना दी कि नोट नहीं बदले जा सकेंगे. मजदूरी से जमा किए गए ये पैसे अब उसके बच्चों के किसी काम में नहीं आ रही है.

समिति की सलाह पर दोनों बच्चों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है, ‘ हमारी मां ने मजदूरी कर हमारे लिए जो रकम छोड़ी है उन रुपयों को नए नोटों में बदलवा दें, क्योंकि बैंक में पुराने नोट बदलने की अंतिम तारीख कब की खत्म हो चुकी है. भाई चाहता है कि इन रुपए की बहन के नाम एफडी करवा दी जाए.’ बच्चों की इस चिट्ठी को प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दिए गए हैं.

क्या इस बार मोदी बन पाएंगे ‘टाइम पर्सन ऑफ द ईयर’, संभावित दावेदारों में शामिल

टाइम पत्रिका द्वारा घोषित किए जाने वाले  ‘टाइम पर्सन ऑफ द ईयर’ लोगों की दौड़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार फिर शामिल हो गए हैं. प्रधानमंत्री टाइम पत्रिका की दुनिया के 100 सबसे ज्यादा प्रभावशाली लोगों की वार्षिक सूची के लिए संभावित दावेदारों में शामिल हैं. टाइम अगले महीने सूची की घोषणा करेगी जिसमें प्रमुख कलाकार, नेता, सांसद, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी तथा उद्योग जगत के नेता शामिल होते हैं!!

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पहले नोटबंदी, फिर सर्जिकल स्ट्राइक और अब विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मिली अपार सफलता के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी दुनिया में लगातार चर्चा का केंद्र रहे हैं. संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस समय अंतर्राष्ट्रीय मंच और मोदी के समान अन्य कोई चर्चा में नहीं है, इसलिए पत्रिका के मुखपत्र पर मोदी छा सकते हैं.

पत्रिका ने पाठकों से संभावित दावेदारों की सूची में शामिल लोगों के लिए वोट देने के लिए कहा है. हालांकि उसके संपादक इस सूची में शामिल होने वाले लोगों पर अंतिम फैसला लेंगे. मोदी पिछले साल भी टाइम पत्रिका के 100 सर्वाधिक प्रभावशाली लोगों की सूची के संभावित दावेदारों में शामिल हुए थे. वह वर्ष 2015 में दुनिया के 100 सबसे ज्यादा प्रभावशाली लोगों में से एक थे और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पत्रिका में उनके लिए प्रोफाइल लिखा था.

गत वर्ष तत्कालीन आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन, टेनिस स्टार सानिया मिर्जा, अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, गूगल के भारतीय मूल के सीईओ सुंदर पिचई और भारतीय ई वाणिज्यिक कंपनी फ्लिपकार्ट के संस्थापक बिन्नी बंसल और सचिन बंसल टाइम की 100 सबसे ज्यादा प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल थे.

इस वर्ष संभावित दावेदारों में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनकी बेटी इवांका ट्रंप और उनके पति तथा वरिष्ठ व्हाइट हाउस सलाहकार जारेड कुश्नर, कैलिफोर्निया से सीनेटर कमला हैरिस, अभिनेता रिज अहमद, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग, पोप फ्रांसिस और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो शामिल हैं. सूची में संभावित दावेदारों में व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ रीन्स प्रीबस, अभिनेता अमी शूमर, यूट्यूब सीईओ सुजैन वोज्सिकी और ट्रंप के सलाहकार केलीन कॉनवे भी शामिल हैं.

टाइम पत्रिका पिछले 90 वर्षों से यानी 1927 से टाइम पर्सन ऑफ द ईयर का खिताब देने का काम कर रही है. अभी तक भारत की तरफ से केवल महात्मा गांधी ने यह खिताब पाया है. मैगजीन के द्वारा ऐसे व्‍यक्ति या व्‍यक्तियों को चुना जाता है जिन्‍होंने जीवन को सही या गलत रूप से प्रभावित किया है. पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह खिताब जीता था.

अवसाद से मुक्ति का मंत्र, दबने की बजाए खुलकर व्यक्त करें : मन की बात में पीएम नरेंद्र मोदी

दुनिया में 35 करोड़ लोगों के अवसाद से पीड़ित होने का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अवसाद से मुक्ति मिल सकती है और इसका पहला मंत्र है कि इससे दबने की बजाए उसे व्यक्त करें. आकशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग शरीर स्वास्थ्य के संबंध में जागरूक होते हैं, वे तो हमेशा कहते हैं – पेट भी थोड़ा खाली रखो, प्लेट भी थोड़ी खाली रखो. और जब स्वास्थ्य की बात आई है, तो 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस है. संयुक्त राष्ट्र ने 2030 तक सबको स्वास्थ्य का लक्ष्य तय किया है. इस बार संयुक्त राष्ट्र ने 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस पर ‘अवसाद’ विषय पर फोकस किया है.

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प्रधानमंत्री ने कहा कि अवसाद इस बार उनका मुख्य विषय है. हम लोग भी अवसाद शब्द से परिचित हैं. एक अनुमान है कि दुनिया में 35 करोड़ से ज्यादा लोग मानसिक अवसाद से पीड़ित हैं. मुसीबत ये है कि हमारे अगल-बगल में भी इस बात को हम समझ नहीं पाते हैं और शायद इस विषय में खुल कर के बात करने में हम संकोच भी करते हैं. जो स्वयं अवसाद ग्रस्त महसूस करता है, वो भी कुछ बोलता नहीं, क्योंकि वो थोड़ी शर्मिंदगी महसूस करता है.

पीएम मोदी ने कहा, ‘‘मैं देशवासियों से कहना चाहूंगा कि अवसाद ऐसा नहीं है कि उससे मुक्ति नहीं मिल सकती है. एक मनोवैज्ञानिक माहौल पैदा करना होता है और उसकी शुरुआत होती है. पहला मंत्र है, अवसाद से दबने की बजाय उसे व्यक्त करने की जरूरत है.’’ उन्होंने कहा कि अपने साथियों के बीच, मित्रों के बीच, मां-बाप के बीच, भाइयों के बीच, शिक्षक के साथ खुल कर के कहिए आपको क्या हो रहा है. कभी-कभी अकेलापन खास कर के हॉस्टल में रहने वाले बच्चों को तकलीफ ज्यादा हो जाती है. हमारे देश का सौभाग्य रहा कि हम लोग संयुक्त परिवार में पले-बढ़े हैं, विशाल परिवार होता है, मेल-जोल रहता है और उसके कारण अवसाद की संभावनायें खत्म हो जाती हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि लेकिन फिर भी मैं मां-बाप को कहना चाहूंगा कि आपने कभी देखा है कि आपका बेटा या बेटी या परिवार का कोई भी सदस्य अचानक अकेला रहना पसंद करने लगा है. आपका कभी ध्यान गया है कि ऐसा क्यों करता है? आप जरूर मानिए कि वह अवसाद की दिशा का पहला कदम है, अगर वह आप के साथ समूह में रहना पसंद नहीं करता है, अकेला एक कोने में चला जा रहा है तो प्रयत्नपूर्वक देखिए कि ऐसा न होने दें. पीएम मोदी ने कहा कि उसके साथ खुल कर के जो बात करते हैं, ऐसे लोगों के बीच उसे रहने का अवसर दीजिए. हंसी खुशी से खुल कर के बातें करने के लिये प्रेरित करें, उसके अन्दर कौन-सी कुंठा कहां पड़ी है, उसको बाहर निकालिए. ये उत्तम उपाय है.

उन्होंने कहा कि अवसाद मानसिक और शारीरिक बीमारियों का कारण बन जाता है. जैसे मधुमेह हर प्रकार की बीमारियों का यजमान बन जाता है. अवसाद टिकने की, लड़ने की, साहस करने की, निर्णय करने की, हमारी सारी क्षमताओं को ध्वस्त कर देता है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे मित्र, परिवार, परिसर, माहौल – ये मिलकर के ही हमें अवसाद में जाने से रोक सकते हैं और अगर चले गए हैं, तो बाहर ला सकते हैं. एक और भी तरीका है, अगर अपनों के बीच में आप खुल करके अपने को व्यक्त नहीं कर पाते हों, तो एक काम कीजिए, अगल-बगल में कही सेवा-भाव से लोगों की मदद करने चले जाइए. मन लगा के मदद कीजिए, उनके सुख-दुख को बांटिए, आप देखना, आपके भीतर का दर्द यूं ही मिटता चला जाएगा आपके अन्दर एक नया आत्मविश्वास पैदा होगा. आप अपने मन के बोझ को बहुत आसानी से हल्का कर सकते है.

मातृत्व अवकाश 26 सप्ताह करने से 18 लाख महिलाओं को फायदा होगा : पीएम नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया है जिससे औपचारिक क्षेत्र में काम करने वाली करीब 18 लाख महिलाओं को इसका फायदा मिलेगा. आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं जरूर आज एक बात करना चाहूंगा, क्योंकि आज स्वास्थ्य की ही चर्चा निकली है, स्वास्थ्य की बातें काफी हुई हैं. हमारे देश में कामकाजी वर्ग में जो हमारी महिलायें हैं और दिनों-दिन उनकी संख्या भी बढ़ रही है, उनकी भागीदारी बढ़ रही है और ये स्वागत योग्य है, लेकिन साथ-साथ, महिलाओं के पास विशेष जिम्मेवारियां भी हैं. तो पिछले दिनों भारत सरकार ने एक बढ़ा महत्वपूर्ण निर्णय किया है!

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पीएम मोदी ने कहा कि वे परिवार की जिम्मेवारियां संभालती हैं, घर की आर्थिक जिम्मेवारियां भी उनको निभानी पड़ती है और उसके कारण कभी-कभी नवजात शिशु के साथ अन्याय हो जाता है. भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला किया है. ये जो कामकाजी वर्ग की महिलायें हैं, उनको प्रसूति के समय, गर्भावस्था के समय, बच्चे को जन्म देने के समय पहले 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलता था, उसे अब बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है.

उन्होंने कहा कि दुनिया में शायद दो या तीन ही देश हैं, जो हम से आगे हैं. भारत ने एक बहुत बड़ा महत्वपूर्ण फैसला हमारी इन बहनों के लिये किया है. और उसका मूल उद्देश्य उस नवजात शिशु की देखभाल, भारत का भावी नागरिक, जन्म के प्रारंभिक काल में उसकी सही देखभाल हो, मां का उसको भरपूर प्यार मिले. तब ये बालक बड़े हो करके देश की अमानत बनेंगे.

प्रधानमंत्री ने कहा कि माताओं का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा और इसलिये ये बहुत बड़ा महत्वपूर्ण निर्णय है. और इसके कारण औपचारिक क्षेत्र में काम करने वाली करीब 18 लाख महिलाओं को इसका फायदा मिलेगा.

‘मन की बात’ में पीएम नरेंद्र मोदी ने की अपील, एक दिन पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल करना छोड़ें लोग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30वें मन की बात कार्यक्रम के जरिए देश की जनता को संबोधित किया. पीएम नरेंद्र मोदी ने मन की बात में लोगों से एक दिन पेट्रोल डीजल का प्रयोग न करने की अपील की. इसके साथ ही पीएम मोदी ने खाने की बरबादी का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने लोगों से खाना बरबाद न करने को कहा. पीए मोदी ने अपने मन की बात करते हुए डिप्रेशन की बात भी की और कहा कि योग के माध्यम से लोग अपने मन को ठीक रख सकते हैं और डिप्रेशन से दूर रह सकते हैं. पीएम मोदी ने कालाधन, भ्रष्टाचार, महिलाओं की मैटरनिटी लीव, स्वच्छा आदि मुद्दों को भी अपने संबोधन में उठाया. उन्होंने डिजिटल पेमेंट पर जोर दिया. अपने 29वें ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय वैज्ञानिक समुदाय की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा था कि 15 फ़रवरी, 2017 भारत के जीवन में बेहद गौरवपूर्ण दिवस के रूप में याद किया जाएगा.

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आज के मन की बात कार्यक्रम की मुख्य बातें –

  • बांग्लादेश भारत का मित्र है. गुुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर ने  बांग्लादेश का राष्ट्रगान लिखा. हमें गर्व है कि रवीन्द्रनाथ टैगोर, उनकी यादें, हमारी एक साझी विरासत है. बांग्लादेश का राष्ट्रगान भी गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचना है.
  • न्यू इंडिया पर पीएम मोदी ने यूं रखी अपने मन की बात
    • न्यू इंडिया कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं, यह सवा सौ करोड़ लोगों का सपना है.
    • सभी देशवासी अगर संकल्प करें और मिलकर कदम उठाते चलें, तो न्यू इंडिया का सपना हमारे सामने सच हो सकता है.
    • हर नागरिक अपने नागरिक धर्म और कर्तव्य का पालन करे, यही अपने आप में न्यू इंडिया की एक अच्छी शुरुआत बन सकता है.
    • छोटी-छोटी चीजों के जरिए लोग न्यू इंडिया का सपना पूरा होते हुए देख पाएंगे-
    • मैं आपको निमंत्रण देता हूं कि स्वराज से सुराज की इस यात्रा में हम सभी जीवन को अनुशासित कर, संकल्पबद्ध करके जुड़े.
    • मन की बात में बोले पीएम- देश वासियों में एक नई उमंग है.

    डिजिटल पेमेंट, कालाधन और भ्रष्टाचार पर पीएम नरेंद्र मोदी की मन की बात

    • पिछले कुछ महीनों में बहुत बड़ी मात्रा में लोग डिजिटल पेमेंट डिजिधन आंदोलन में शरीक़ हुए.
    • पीएम मोदी ने पूछा, कालाधन के खिलाफ लड़ाई आगे बढ़ाने के लिए देशवासी एक वर्ष में 2500 करोड़ डिजिल लेन-देन करने का संकल्प कर सकते हैं क्या?
    • इससे आप देश की सेवा करते हुए कालाधन, भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई के एक वीर सैनिक बन सकते हैं.

    पेट्रोल डीजल एक दिन के लिए छोड़ने की अपील

    • पीएम नरेंद्र मोदी ने की अपील, लोग हफ्ते में एक दिन पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल करना छोड़ें.
    • न्यू इंडिया ट्रैफिक नियमों का पालन करें, एक दिन पेट्रोल डीजल का प्रयोग न करने का संकल्प करें.
    • मन की बात में बोले पीएम- ट्रैफिक नियमों का पालन जरूर करें
    • 14 अप्रैल को डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर की जन्म-जयंती है और उनकी जन्म-जयंती पर डिजि-मेला का समापन होने वाला है.

    स्वच्छता को लेकर पीएम मोदी की जनता से यह थी अपील -

    • मेरे प्यारे देशवासियो, जब भी मन की बात के लिये लोगों से सुझाव माँगता हूँ मैंने देखा है कि स्वच्छता के विषय में हर बार आग्रह रहता ही है.
    • मैं चाहता हूं, देशवासियों के मन में गंदगी के प्रति गुस्सा हो, जब गुस्सा होगा तब हम गंदगी के खिलाफ़ कदम उठाएंगे.
    • मैं यही तो चाहता हूँ,सवा-सौ करोड़ देशवासियों के मन में गन्दगी के प्रति गुस्सा पैदा हो.
      • एक बार गुस्सा पैदा होगा, नाराज़गी पैदा होगी, उसके प्रति रोष पैदा होगा, हम ही गन्दगी के खिलाफ़ कुछ-न-कुछ करने लग जाएँगे.
      • ढेड़ करोड़ लोगों ने भीम एप डाउनलोड किया, 70,000 लोगों ने व्यापारियों वाला पुरस्कार प्राप्त किया.

      खाने की बरबादी पर पीएम की यह रही अपील -

      • पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि खाने की बरबादी न करें. उन्होंने कहा कि लोगों ने इस संबंध में अपनी चिंता से उन्हें अवगत कराया है.
      • पीएम ने कहा कि लोग खाना बरबाद न करें, थाली में जूठन न छोड़ें. पीएम ने कहा कि मैं इस विषय पर ज़्यादा आग्रह नहीं कर रहा हूँ, लेकिन मैं चाहूँगा कि ये जागरूकता बढ़नी चाहिए. हम उतना ही लें, जितना खाना है. उन्होंने कहा कि हम प्लेट में उतना ही खाना लें जितना खा सकें, खाना बरबादद ना करें.

      डिप्रेशन पर पीएम नरेंद्र मोदी ने यह कहा -

      • 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस है, वर्ल्ड हेल्थ डे पर  इस बार संयुक्त राष्ट्र ने विश्व स्वास्थ्यदिवस पर डिप्रेशन विषय पर फोकस किया है.
      • मैं देशवासियों से कहना चाहूँगा कि डिप्रेशन ऐसा नहीं है कि उससे मुक्ति नहीं मिल सकती है.
      • ऐसा नहीं है कि डिप्रेशन से मुक्ति नहीं मिल सकती, एक मनोवैज्ञानिक माहौल पैदा करना होता है जिससे इसकी शुरुआत होती है. पीएम मोदी ने कहा कि डिप्रेशन में सप्रेशन की जगह एक्र्सप्रेशन जरूरी है.
      • पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि सेवा-भाव से लोगों की मदद करिए, उनके सुख-दुःख को बांटिए, आप देखना, आपके भीतर का दर्द यूं ही मिटता चला जाएगा.
      • वैसे योग भी अपने मन को स्वस्थ रखने के लिये एक अच्छा मार्ग है. तनाव, दबाव से मुक्ति, प्रसन्न चित्त की ओर प्रयाण – योग बहुत मदद करता है.
      • दुनिया में 35 करोड़ लोग अवसाद के शिकार हैं, हमें इसको लेकर बात करनी चाहिए.