भारत-इजराइल का साथ मित्रता का है, मिलने में 70 साल लग गए पीएम मोदी के भाषण की 10 खास बातें

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपनी इजराइल यात्रा के दौरान कन्वेन्शन सेंटर में भारतीय कम्युनिटी के बीच जाकर उन्हें संबोधित किया. इस मौके पर इजरायल पीएम बेंजामिन नेतन्याहू भी उनके साथ मौजूद रहे. मोदी ने अपने स्पीच की शुरुआत हिब्रू में की और इजरायली लोगों का अभिवादन किया. पेश है प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की 10 खास बातें -

  1. ”मैं आपसे मेरी बात की शुरुआत इसी कन्फेशन से करना चाहता हूं. वाकई, बहुत दिन बाद मिले. दिन भी कहना ठीक नहीं है. सच यह है कि मिलने में हमें कई साल लग गए. 10-20-50 नहीं, 70 साल लग गए.
  2. आजादी के 70 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री आज आप सभी के आशीर्वाद ले रहा है. इस अवसर पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू यहां मौजूद हैं.” इजरायल में किसी भारतीय नेता का इस तरह का पहला इवेंट है.
  3. जो सम्मान मुझे दिया वह भारत के सवा सौ करोड़ लोगों का सम्मान है. हम दोनों ही अपने अपने देशों की स्वतंत्रता के बाद पैदा हुए हैं. भारतीय भूमि के प्रति उनका प्यार..उन्हें भारत खींच लाने वाला है.
  4. भारत और इजराइल कई साल से गहराई से जुड़े हुए हैं. आज भी यह जगह येरुशलेम और भारत के संबंधों का प्रतीक है. भारत-इजराइल का साथ परंपराओं, संस्कति, विश्वास, मित्रता का है.
  5. मैं इजराइल की शौर्यता को प्रणाम करता हूं. किसी भी देश का विकास, आकार उसके नागरिकों का भरोसा तय करता है. संख्या बढ़ाना उतना मायने नहीं रखता ये इजराइल ने कर दिखाया है. हाइफा की आजादी में भारतीय सैनिकों का हाथ है.
  6. हमारे त्योहारों में भी अद्भुत समानता है. भारत में होली की तरह यहां भी ऐसा ही त्योहार मनाया जाता है. भारत में दिवाली तो यहां हनुका मनाया जाता है.
  7. शौर्य इजराइल के विकास का आधार रहा है. किसी भी देश का विकास और आकार उसके देश के नागरिकों के भरोसे पर तय होता है. संख्या और आकार मायने नहीं रखती, यह इजराइल साबित किया है.
  8. एलिश एस्टन को द इंडियन के नाम से भी जान जाता है. ब्रिटिश काल के दौरान उन्होंने मराठा इन्फ्रेंट्री में काम किया था. प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान हाइफा को आजाद कराने में भारतीयों की भूमिका रही है. मेरा सौभाग्य है कि मैं उन वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने हाइफा जा रहा हूं.
  9. मैं भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जफरयाब जैकब का जिक्र करना चाहता हूं. उनके पुरखे बगदाद से भारत आए. 1971 में जब बांग्लादेश पाक से आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था, तब उन्होंने पाक सैनिकों का समर्पण कराने में अहम भूमिका निभाई है यहूदी लोग भारत में कम संख्या में रहे लेकिन जिस भी क्षेत्र में रहे, उन्होंने उपस्थिति अलग से दर्ज कराई. सिर्फ सेना ही नहीं, साहित्य, संस्कृति, फिल्म में भी यहूदी लोग अपनी इच्छाशक्ति के दम पर आगे बढ़े हैं.
  10. मेरी सरकार का एकमात्र फॉर्मूला – रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफ़ॉर्म है.

Leave a Reply